आध्यात्मिक यात्राये

कामाख्या देवी 






नमस्ते देवी अधिष्ठात्री ,नमस्ते त्रिपुर सुंदरी

नमस्ते कामरूपी कामख्या नमस्ते जगात्कारिणी

मूलाधारे कुण्डलिनी रूप विराजी , माँ सुंदरी की जय कहे सब नर नारी

स्वयं सिद्धा परमेश्वरी तुम , शिव नाभि से निकली सवारी

जो दल छू ले माँ अष्टभुजाधारिणी , सहस्त्र दल पुलकित हो जग की प्यारी

अध्काले तवं देवी माँ भगवती कामख्या ये जग तुममे ,

माँ कुण्डलिनी शक्ति की  संचारी 

(ॐ क्रीम क्रीम कामरूप कामख्याये कुण्डलिनी प्रस्तार्निया क्रीम क्रीम ॐ )


डॉ आनंद राम मतावाले (गुरूजी )कामाख्या की तीर्थ यात्रा 





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